दो हाथ से बनी
यह एक मुट्ठि
यह मुट्ठी में सिमटी
एक हसीनं दुनिया
तेरी और मेरी
हवाह में छिपे
राज़ के जैसी
हलकी सी
खोई हुई सी
रेत के जैसी
ज़ोर से पकडो
तो छुट जाये
हाथ छोड़ दो
तो खो जाये
न किसीने देखि
न किसीने महसूस कि
सिर्फ तेरी और मेरी
एक मुट्ठी की यह हसीन दुनिया
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ReplyDelete:) :) :)
Deletechori!!!! ;)
:)
jo chahiye tha wo ho gaya
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