Friday, July 20, 2012
















दो हाथ से बनी
यह एक मुट्ठि 
यह मुट्ठी में सिमटी 
एक हसीनं दुनिया 

तेरी और मेरी 
हवाह में छिपे 
राज़ के जैसी 
हलकी सी 
खोई हुई सी 

रेत के जैसी 
ज़ोर से पकडो 
तो छुट जाये 
हाथ छोड़ दो 
तो खो जाये 

न किसीने देखि
न किसीने महसूस कि 
सिर्फ तेरी और मेरी 
एक मुट्ठी की यह हसीन दुनिया 

3 comments:

Hush...!!! I'm Listening...